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इंस्पेक्टर पंत को उच्च न्यायालय ने बहाल कर उसी स्थान पर दी तैनाती--

02 Aug 2019

आलम खान एडिटर की कलम से विशेष रिपोर्ट

अम्बेडकरनगर जनपद के विभिन्न थानों पर तैनात कोतवाल मनोज कुमार पंत को उच्च न्यायलय ने बड़ी राहत देने हुए उसी स्थान पर पुनः बहाल कर दिया है।

नोएडा सेक्टर 20 थाने से मनमाने तरीके से ससपेंड किए गए प्रभारी इंस्पेक्टर मनोज पंत को बहाल करने के साथ उसी स्थान पर पुनः तैनाती करने का उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है।
उच्च न्यायालय ने एसएसपी गौतमबुद्धनगर द्वारा इंस्पेक्टर मनोज पंत को ससपेंड किये गए आदेश दिनांक 30.01.19 को स्टे किया और साथ ही सस्पेंशन आदेश के सभी प्रभाव और प्रक्रिया पर अगले आदेशों तक रोक लगा दी है ।
गौरतलब है कि दिनांक 15 जुलाई 2019 को सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय द्वारा एसएसपी गौतमबुद्धनगर से इस प्रकरण में जवाब मांगा गया था, दिनांक 30 जुलाई 2019 को सुनवाई के दौरान कोई जवाब नहीं दे पाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और 6 हफ्ते के अंदर काउंटर एफिडेविट के माध्यम से अपना पक्ष रखने के लिए कहा है । विधि विरुद्ध सस्पेंशन पर नाराजगी जाहिर करते हुए रिट में पार्टी बनाये गए अधिकारियों से 6 हफ्ते के अंदर काउंटर के माध्यम से अपनी सफाई देने का निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय की एकल खंडपीठ (न्यायमूर्ति श्री अश्वनी कुमार मिश्रा) की कोर्ट ने अंतरिम स्टे आदेश जारी किया। इंस्पेक्टर मनोज पंत को सैलरी सहित सभी देय लाभ के साथ पूर्व की स्थिति में सेवा जारी करने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट के इस आदेश से पुलिस  अधिकारियों में खलबली मची हुई है, ऐसी स्थिति में इंस्पेक्टर मनोज पंत को सेक्टर 20 प्रभारी इंस्पेक्टर के तौर पर तैनात करना होगा। सूत्रों की माने तो पूरा प्रकरण आईपीएस लॉबी के शीत युद्ध के तहत व्यक्तिगत द्वेष के कारण मनोज पंत को बलि का बकरा बनाया गया था। तेजतर्रार मनोज कुमार पंत की जहां पर तैनाती हुई वहां पर नशा माफियाओं के पसीने छूट गए। अम्बेडकरनगर जनपद में भी रहते हुए श्री पंत ने नशा माफियाओं सहित जुआ अड्डों व गौकसी पर पूरी तरह पाबंदी लगा दिया था और साथ ही साथ जाम मुक्त समाज देने में भी बड़ी सफलता प्राप्त किया था।



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