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रूहअफ़्ज़ा का बाज़ारों से ग़ायब होना भी रोजेदारों की परीक्षा

08 May 2019

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सख्त तपिश के मौसम में पवित्र माह रमज़ान के दौरान रोजेदारों का हौसला काफी बुलंद है लेकिन इफ़्तार के दौरान रूहअफ़्ज़ा की कमी साफ नज़र आती है।

भारत में मंगलवार से शुरू पवित्र माह रमज़ान के दौरान रोजेदारों की सख्त आज़माइश चल रही है। लगभग 15 घंटों तक बिना एक कतरा पानी के पूरे माह रखा जाने वाला रोज़ा शाम को अपने निर्धारित समय से खोला जाता है इसे इफ़्तार कहते हैं। उत्तर भारतीय इफ़्तार के दौरान प्यास बुझाने के लिए हमदर्द लैबोरेटिज़ का बना रूहअफ़्ज़ा शर्बत इस्तेमाल करते हैं लेकिन इस बार रूहअफ़्ज़ा बाज़ार से गायब है हालांकि कुछ दुकानदारों के पास तो है मगर पिछले साल के मुकाबले काफी मंहगा है। बाजार से अचानक रूहअफ़्ज़ा गायब होने का मुख्य कारण हमदर्द कंपनी के सीईओ की कुर्सी को लेकर अब्दुल मजीद व उनके चचेरे भाई हम्मद अहमद के बीच चल रहे कानूनी विवाद के कारण अदालत ने रूहअफ़्ज़ा के उत्पादन पर रोक लगा दी थी। आपको बताते चलेंकि हमदर्द दवाखाना एक इस्लामिक वक़्फ़ के रूप में पंजीकृत है जिसके लाभ का 85 प्रतिशत शैक्षिक चैरिटी को दान जाता है। दिल्ली में संचालित जामिया हमदर्द डीम्ड यूनिवर्सिटी का निजी मेडिकल कॉलेज भी है जो इन्हीं पैसों से संचालित होता है। हमदर्द लैबोरेटिज़ द्वारा प्रमुख उत्पाद में रूहअफ़्ज़ा के अतिरिक्त साफ़ी, चिंकारा, मस्तूरीन, जोशिना आदि ब्रांडेड दवाएं शामिल है। जानकारी के लिए बता दें कि मौजूदा दौर में अब्दुल मजीद हमदर्द लैबोरेटिज़ चलाते थे लेकिन उनके चचेरे भाई हम्मद अहमद ने हमदर्द पर अपना दावा पेश करते हुए अदालत चले गए जहां से रूहअफ़्ज़ा शर्बत पर पाबंदी लगा दी गई। विगत पांच माह से उत्पादन ठप होने से धीरे धीरे पूरी बाजार से रूहअफ़्ज़ा ग़ायब हो गया। पवित्र माह रमज़ान शुरू होने से पूर्व कुछ उत्पादन शुरू हुआ लेकिन रमज़ान में होने वाली माँग से उत्पादन काफी कम है जिसके कारण रूहअफ़्ज़ा की काला बाजारी शुरू हो गई। पिछले वर्ष 115 व 120 रुपये में मिलने वाली रूहअफ़्ज़ा की बोतल इस बार बड़ी मुश्किल से 160 से 180 रुपये में मिल रही है। हालांकि रूहअफज़ा के मुकाबले में कई ब्राण्ड मार्केट में आए लेकिन रूहअफजा जैसा आनन्द किसी में भी नज़र नहीं आता है।
रूहअफ़्ज़ा को चीनी नीबू के साथ बनाया जाता है जबकि काफी लोग इसे दूध में बनाते है जिससे प्यास बुझने में मदद मिलती है। उत्तर भारत के लगभग सभी मुस्लिम परिवारों द्वारा रूहअफ़्ज़ा को विशेष रूप से इस्तेमाल किया जाता है जिसके कारण रमज़ान माह में इसकी मांग कई गुना अधिक हो जाती है। 
बहरहाल सख्त गर्मी के मौसम में रोज़ेदारों का हौसला काफी बुलंद है लेकिन इफ्तार के दौरान रूहअफ़्ज़ा ना मिलने की कसक जरूर नज़र आ रही है लेकिन अधिकांश रोज़ेदार इस सख्त मौसम में रूहअफ़्ज़ा का ना मिलना भी ईश्वर की परीक्षा बता रहे हैं। 



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