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ईवीएम पर उठी उँगली तो चुनाव आयोग ने लिया बड़ा फैसला

19 Dec 2018

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ईवीएम अर्थात इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से चुनाव प्रणाली सम्पन्न कराने के दौरान चुनाव आयोग पर काफी उंगलियां उठी जबकि चुनाव आयोग ने ईवीएम में किसी भी तरह की गड़बड़ी होने से इनकार किया। आगामी लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान पूरे भारत में वी.वी.पैट ईवीएम का प्रयोग किया जाना है। आयोग के निर्देश पर सभी जनपदों में आम मतदाताओं को जागरूक करने के लिए वी.वी.पैट युक्त ईवीएम का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

वोटर वेरीफ़ाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानी वीवीपैट (वीवीपीएट) व्यवस्था के तहत वोटर डालने के तुरंत बाद काग़ज़ की एक पर्ची बनती है। इस पर जिस उम्मीदवार को वोट दिया गया है, उनका नाम और चुनाव चिह्न छपा होता है। ईवीएम में लगे शीशे के एक स्क्रीन पर यह पर्ची सात सेकंड तक दिखती है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड ने यह मशीन 2013 में डिज़ायन किया। सबसे पहले इसका इस्तेमाल नागालैंड के चुनाव में 2013 में हुआ। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपैट मशीन बनाने और इसके लिए पैसे मुहैया कराने के आदेश केंद्र सरकार को दिए। चुनाव आयोग ने जून 2014 में तय किया किया अगले चुनाव यानी साल 2019 के चुनाव में सभी मतदान केंद्रों पर वीवीपैट का इस्तेमाल किया जाएगा। यह व्यवस्था इसलिए है कि किसी तरह का विवाद होने पर ईवीएम में पड़े वोट के साथ पर्ची का मिलान किया जा सके। हाल ही के कई प्रदेशों में हुए चुनाव को वी.वी.पैट युक्त ईवीएम मशीन का प्रयोग किया गया जिससे ईवीएम पर उठने वाले सवालिया निशान पर बहुत हद तक रोक लगाने में चुनाव आयोग सफल भी रहा। लोकसभा चुनाव से पूर्व आम मतदाताओं को वी.वी.पैट युक्त ईवीएम के प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षण व प्रदर्शन किया जा रहा है। अम्बेडकरनगर जनपद के अपर जिलाधिकारी गिरिजेश कुमार त्यागी ने बताया कि कलेक्ट्रेट भवन में जागरूकता केंद्र स्थापित करने के साथ पूरे जनपद में आठ टीमों द्वारा क्रमानुसार बूथों व सार्वजनिक स्थलों पर वी.वी.पैट युक्त ईवीएम का प्रदर्शन व प्रशिक्षण किया जा रहा है।



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