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ईद का चांद निकलने पर प्रत्येक मुसलमान को करना होता है ये काम

15 Jun 2018

सूचना न्यूज़ एडिटर आलम खान की विशेष रिपोर्ट

क्या है फितरा और किसे देना है !

इस्लाम धर्म में धनी लोगों की रकम में से गरीबों व मिस्कीनों का एक हिस्सा तय किया गया है जिसे हम जकात के रूप में जानते है जबकि ईद उल फितर पर सभी मुसलमानों को फितरा निकालना अनिवार्य होता है। फ़ितरा रमज़ान के रोज़े पूरे होने के बाद यानि ईद का चांद दिखने के बाद से लेकर ईद की नमाज़ अदा करने के बीच दिया जाता है। ये एक तरह का सदका (दान) है जो हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है चाहे वो बच्चा हो, बुढा हो, औरत हो या लड़की हो या लड़का। अगर कोई बच्चा ईद के दिन भी नमाज़ से पहले जहम लड़ता है तो उसके अभिभावक पर उसका भी फितरा निकलना लाज़िम है। सदका-ए-फितर रोजे को पाक करता है इसलिए हर मुसलमान को हर हाल में फ़ितरा देना चाहिये। फितरा (दान) विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्य है, इसे नहीं देना एक मुसलमान को गुनाह का भागीदार बनाता है।

फितरा कब और कितना देना है !

पैगम्बर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद सल्ल. के दौरे हयात में खाने पीने की वस्तुएं फितरा में निकाली जाती थी। उस समय सआ मापने का यंत्र था जो दो किलो 600 ग्राम होता है। प्रत्येक व्यक्ति जो आम दिनों में भोजन में प्रयोग करता है उसी के हिसाब से फितरा निकाला जाता है। आम खुराक या खाद्य पदार्थ फितरा के रूप में निकाला जा सकता है लेकिन जमाने के हिसाब से उसकी कीमत जोड़ कर निकालना भी सही है। इस्लामिक विद्वान मुफ़्ती कमरुद्दीन साहब ने बताया कि इस बार एक आम मुस्लिम पर 40 रुपया फितरा की रकम तय की गई है। फितरा के साथ अपनी हैसियत के अनुसार सदका भी अधिक से अधिक करें।



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