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जानिए कैसे शुरू हुई कुर्बानी और इन बातों का रखें ख्याल

01 Sep 2017

सूचना न्यूज़ परिवार की तरफ से सभी पाठकों को ईद उल अज़हा की हार्दिक बधाई

इस्लाम धर्म में जानवरों की कुर्बान करने की प्रथा काफी पुरानी है। इस्लामी मान्यता के अनुसार पैगम्बर हजरत इब्राहिम को एक बार सपने में अल्लाह ने अपनी सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी देने का हुकूम हुआ तो उन्होंने दो दिनों तक सैकड़ों ऊंटों की कुर्बानी दी लेकिन फिर भी वही आदेश होता रहा कि अपनी सबसे प्यारी चीज़ को अल्लाह की राह में कुर्बान करो तो हजरत इब्राहिम ने अपना बेटा जो बहुत ही प्यारा था उसे कुर्बानी देने की तैयारी कर ली। जब अपने बेटे को अल्लाह के लिए हजरत इब्राहिम कुर्बान कर रहे थे, तो उनसे अपने बेटे को ऐसी स्थिति में देखा नहीं गया। इसलिए उन्होंने उस वक्त अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली। उसके बाद उन्होंने अपने बेटे की गर्दन पर छुरी चला दी। लेकिन अल्लाह ने उसकी सच्ची निष्ठा को देखते हुए हजरत इब्राहिम के बेटे को हटाकर उनकी छुरी के नीचे एक दुम्बा (मेमना) खड़ा कर दिया।

कुर्बानी के बाद जब हजरत इब्राहिम ने अपनी आंखों से पट्टी हटाई तो देखा कि बेटा जिंदा है और उसकी जगह उसने एक जानवर को कुर्बान कर दिया। अपने बेटे को जिंदा देखकर हजरत इब्राहिम काफी खुश हुए उसी समय एक आवाज़ आई कि अल्लाह को आपकी नीयत देखना था। बताया जाता है कि इसकी याद में ही यह कुर्बानी का पर्व मनाया जाता है और यहीं से बकरीद पर जानवर की कुर्बानी देने की प्रथा शुरू हो गई।
बकरीद पर मुस्लिम समुदाय के लोग इस दिन सुबह उठकर स्नान करने के बाद नए कपड़े पहनते हैं। बाद में मस्जिद जाकर नमाज ईद उल अज़हा अदा करते हैं। नमाज पढ़ने के बाद सभी लोग एक दूसरे के गले मिलते हैं और ईद की बधाई देते हैं। इस दिन गरीबों को दान देने का भी विधान है। नमाज के बाद जानवर की कुर्बानी दी जाती है। कुर्बानी के गोश्त को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाता है, जिसमें से एक हिस्सा कुर्बानी करने वाला अपने घर में रख लेता है तो बाकी के दो हिस्से बांट दिए जाते हैं।
बकरीद पर्व पर हमें कुछ बातें का विशेष ध्यान देना चाहिए जैसे प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी कदापि ना करें जिससे किसी अन्य धर्म के भाई की आस्था को ठेस ना लगे एंव कुर्बानी के जानवरों का गोश्त आदि की नुमाइश ना करे तथा उसके मलबों को गड्डों में दफन कर दें। कुर्बानी का गोश्त तबर्रुक है इसलिए नाली आदि में कदापि ना फेंके जिससे साफ सफाई प्रभावित ना होने पाए, साथ ही साथ इस बात का भी ख्याल रखें कि गोश्त को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते समय ढक कर ही ले जाएं। धयान रहे कि कुर्बानी पैगम्बर हज़रत इब्राहीम की सुन्नत है और ये अल्लाह की रज़ा के लिए अदा की जाती है इसलिए काफी शालीनता पूर्वक इस पर्व को मनाएं।



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