Today,

मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी मदरसों को बदनाम करने की साजिश-गृहमंत्री दे जवाब: मौलाना अरशद मदनी

08 Aug 2017

सूचना न्यूज़ ने इस ख़बर कोंसभार प्रकाशित किया है।

नई दिल्ली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, शामली देवबंद में छापेमारी कर तीन मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार करके उनका संबंध बांग्लादेशी आतंकवादी संगठन से जोड़ने और मदारिस इस्लामिया को बदनाम करने की एटीएस उत्तर प्रदेश की कोशिश आखिरकार विफल हुई और 24 घंटे की पूछताछ के बाद कोई भी पुख्ता सबूत सामने न आने के कारण इन तीनों युवकों को आज छोड़ दिया गया।

देवबंद से गिरफ्तार किए गए इन तीनों मुस्लिम युवक दारुल उलूम देवबंद व अन्य मदरसों में अध्ययनरत हैं। इनमें दो का संबंध कश्मीर से है जबकि एक बिहार का रहने वाला है। इन तीनों मुस्लिम युवको को छोड़ दिए जाने के बाद क्षेत्र के मुसलमानों ने राहत की सांस ली है लेकिन सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली और देवबंद में छापेमारी और हिरासत में लिए गए निर्दोष मुस्लिम नौजवानों को लेकर एटीएस और मीडिया ने बढ़ा चढ़ाकर जो दावे पेश किए और उनके साथ मदरसों को आतंकवाद के अड्डे बताने की साजिश की गई इससे मुसलमानों में काफी रोष है। जमीअत उलमा हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे देश की खुफिया एजेंसियों और तथाकथित राष्ट्रीय मीडिया की मदरसों के खिलाफ साजिश करार दिया है। मौलाना सैयद अरशद मदनी ने मिल्लत टाइम्स को विज्ञप्ति जारी करके कहा कि इससे पहले भी विभिन्न अवसरों पर ऐसा दिखाने की कोशिश की गई है, जैसे मदारिस इस्लामिया आतंकवादी अड्डे हो लेकिन अल्लाह का शुक्र है कि आज तक देश की खुफिया एजेंसियां किसी भी मदरसे के खिलाफ कोई सबूत पेश करने में नाकाम रही हैं। इतना ही नहीं खुद भाजपा के गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी भी संसद में इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि मदरसों का आतंकवाद से कोई संबंध नहीं है और किसी भी मदरसे के खिलाफ सरकार के पास कोई सबूत नहीं है। मौलाना मदनी ने कहा कि इस्लामिया मदरसों की भूमिका हमेशा साफ है और मदरसों ने देश की आजादी की लड़ाई में जो कुर्बानियां दी हैं वह नाक़ाबिले भूल हैं और उनके सामने मौजूदा राजनीतिक दलों का कद बहुत छोटा है। इसके बावजूद बार बार मदरसों को निशाना बनाया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि यह सब मुसलमानों के खिलाफ नफरत पैदा करने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है अन्यथा इन युवकों को आतंकवाद के आरोप में पकड़ा ही क्यों गया? जब मीडिया ने उन्हें आतंकवादी के रूप में बदनाम कर दिया तब जांच एजेंसी ने कह दिया कि उनके खिलाफ सबूत नहीं है इसलिए हम छोड़ रहे हैं आखिर यह जांच इन युवकों गिरफ्तार किये जाने से पहले ही क्यों नहीं गई? मौलाना मदनी ने कहा कि 24 घंटे तक सभी चैनल इन युवकों को आतंकवादी के रूप में पेश करते रहे और उनके नाम अलग आतंकवादी संगठनों से जोड़ दिए गए जबकि जांच में वह निर्दोष पाए गए। इतना ही नहीं उसकी आड़ में एक बार फिर इस्लामिया मदरसों को निशाना बनाया गया और विश्व प्रसिद्ध दारुल उलूम की गरिमा को भी आहत करने की साजिश रची गई। यह भी एक अपराध से कम नहीं है। इसलिए इन अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए जिनकी वजह से इन युवकों, उनके परिवारों, शिक्षकों और मदरसों के ज़िम्मेदारों को मानसिक तनाव से दो-चार होना पड़ा और मुसलमानों की भावनाएं आहत हुई। मोलाना मदनी ने कहा कि जब तक  गैर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी तब तक यह सिलसिला ऐसे ही जारी रहेगा और निर्दोष युवकों को गिरफ्तार करके उनके कैरियर को ऐसे ही नष्ट किया जाता रहेगा। मौलाना मदनी ने गृहमंत्री से मांग की कि वह उस संबंध में ब्यान जारी कर देश के सामने सच्चाई पेश करें। (साभार)



अन्य खबर